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मुख्य उपलब्धियां

मुख्य उपलब्धियां

संस्था को मत्स्य अनुवांशिक संसाधन प्रबंधन पर अनुसंधान के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में देखा जाता है एवं संस्था ने अपने अनिवार्य अनुसंधान क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:-

  • भारत की मत्स्य विविधता पर एक विकसित डाटाबेस तैयार किया है, जिसमें 2953 फिनफिश प्रजातियों की जानकारी सम्मिलित करी गई है।
  • पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाटों के स्वच्छ जल की मछलियों पर विकसित डाटाबेस, और आठ राज्यों और तीन पारिस्थितिक तंत्रों के लिए मत्स्य विविधता जांच सूची (पश्चिमी घाट, मन्नार की खाड़ी और वेम्बनाड झील)।
  • डेवलप्ड फॉर ऑनलाइन डाटाबेस- फिश बारकोड सूचना प्रणाली, फिश कैरोम, फिश एवं शेलफिश माइक्रोसेटलाइट डेटाबेस एवं फिश मिटोजनम संसाधन।
  • बड़े पैमाने पर विभिन्न नदियों की घाटियों और दो महत्वपूर्ण आकर्षण स्थलों का पता लगाया, अर्थात, मत्स्य घाटी के दस्तावेजों के लिए पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर राज्यों।
  • पिछले 10 वर्षों में अन्य संस्थाओं के साथ गठबंधन के बाद, भारत में पारिस्थितिक विविध निवासों के अन्वेषण के दौरान 43 नई मछली प्रजातियों की खोज करी जा चुकी है।
  • विकसित जेनमिक संसाधन, जिसमें एक्सप्रेस्ड सीक्वेन्स टैग्स एण्ड जीन एसोसिएटेड मेकर्स इन इण्डिया कैटफिश, क्लैरियस मगूर एवं टेन्यूलोसा इलिशा।
  • महत्वपूर्ण समूह से संबंधित मछलियों के फिलोजेनेटिक रिलेशनशिप और आणविक मार्करों के माध्यम से सामान्य अध्ययन। दो व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण मछली प्रजातियों, लैबियो रोहिता और क्लारीस मेगुर के सहयोगी मोड में पूरे जीनोम अनुक्रमण की शुरुआत।
  • 35 फिनफिश प्रजातियों के लिए आणविक मार्करों की पहचान की गई। माइक्रोसैटलाइट पहचान के लिए निर्मित 6 मछली प्रजातियों के लिए जीनोमिक पुस्तकालय।
  • राज्य मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश के किसानों और आसपास के क्षेत्रों को आपूर्ति हेतु आईएमसी की गुणवत्ता बीजों का उत्पादन।
  • 26 फिनफिश की जनसंख्या अनुवांशिक संरचना एवं शेलफिश प्रजातियां भारतीय जल में देशी वितरण रेंज में पढ़ी जाती हैं जो प्रबंधन रणनीतियों, स्टॉक-स्पेसीफिकेशन कंसरवेशन एवं रिवर रेंचिंग प्रोग्राम में मदद करती हैं।
  • आठ मछली प्रजातियों में पूर्ण मिटोकोंड्रियल डीएनए सीक्वेस्ड।
  • भारतीय समुद्रों से जो सही एवं समयकालिक पहचान के लिए 11 हार्मफुल एलगल ब्लूम्स प्रजातियों (8 डिनोफ्लेग्लैट्स एवं 3 सीयानोबैक्टीरिया) का स्पीसीज़-स्पेसिफिक डीएनए प्रोफाईल।
  • 600 भारतीय मरीन एवं फ्रेश वॉटर फिनफिश एवं शेलफिश प्रजातियों का डीएनए बारकोडिंग पूरा किया गया। व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण फिनफिश एवं शेलफिश के स्पिसीज़-स्पेसिफिक मॉलीक्यूलर सिग्नेचर को जनरेट करना ताकि टेक्सोनॉमिक एम्बीग्यूटि को हल किया जा सके एवं प्रजाति विविधता का सही दस्तावेज तैयार किया जा सके।
  • अन्य संस्था के साथ मिलकर, जिसमें कॉलेज ऑफ फिशरीज़, पनानगड़ भी शामिल है 15 ऑर्निमेंटल फिशेज़ के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोटोकॉल का विकास किया। साथ ही 06 लुप्तप्राय मछली प्रजातियों के लिए ब्रीडिंग प्रोटोकॉल्स तैयार किया गया ताकि उनका संरक्षण किया जा सके।
  • डीएनए बारकोडिंग आधारित 3 लीगल विवाद को हल किया गया अर्थात., फॉरेन्सिक आईडेन्टीफिकेशन ऑफ पॉम्फ्रेट (पैम्पस चिनेनसिस), लुप्तप्राय एवं वाईल्डलाइफ संरक्षित व्हेल शार्क (राइनकोडन टाईपस) एवं सी काउ (डुगॉंग डुगॉंग)।
  • 30 मत्स्य प्रजातियों हेतु डेवेल्प्ड स्पर्म क्राइप्रिज़रवेशन प्रोटोकॉल्स, जो की निर्धारित प्रजातियों को उनके प्राकृतिक निवास में कैप्टिव ब्रीडिंग टेक्ननोलॉजी को सपोर्ट कर सके।
  • लुप्तप्राय वेमबनाड झील और आसपास की नदियों में येलो कैटफिश, होराबैगरस ब्रचाइसोमा एवं मालाबार लेबियो, लेबियो डसमीरि का पालन। इस कार्य में आरएआरएस, कुमाराकोम, केरला भी शामिल है।
  • विवो एवं विट्रो एसे सिस्टम में विकसित मछलियों में जलीय प्रदूषण के जीनोटॉक्सिकिटी का आकलन और मूल्यांकन।
  • 20 मत्स्य प्रजातियों में अनुवांशिक विविधता के आकलन के लिए फ्लोरोसेन्स में सिटू हाईब्रिडाइज़ेशन टेक्नीक का इस्तेमाल।
  • 70 लुप्तप्राय एवं एनडेमिक फ्रेशवॉटर मत्स्य प्रजातियों का पूर्ण साइटोजेनेटिक प्रोफाईलिंग।
  • विदेशी मछली प्रजातियों के प्रभावों का आकलन अर्थात., स्वदेशी मछली जैव विविधता पर ओरियोक्रोमिस निलोटिकस, क्लारियस गैरीपाइनस, पंगासिएनडन सुची एवं पायराक्टस ब्रकाइप्मस पूर्ण करना।
  • इण्डिन कैटफिश, हेट्रोप्नेस्टस फोज़िल्स एण्ड लेबियो रोहिता एम्ब्रोयस से डेवलप्ड प्लूरिपोटेन्ट एम्ब्रियोनिक स्टेम सेल लाईन्स।
  • गाईरोडक्टाईलस सलारिस, जी.एलेगन्स, डेक्टाईलोगाईरस इंटरमीडियस, माईसोबोलस सेरब्रेल्स और एम.क्लेरी हेतु विकसित रैपिड डिएनए आधारित डायग्नॉस्टिक ऐसे यूटीलाईजिंग पीसीआर।
  • “स्टेट फिश” के नए कॉन्सेप्ट को बढ़ावा दिया, जिससे 17 राज्यों द्वारा 14 मत्स्य प्रजातियों को स्टेट फिश का दर्जा दिया गया।
  • डीएएचडीएफ एवं एनएफडीबी के कार्यान्वयन को समन्वयित करना, नेशनल सर्विलान्स प्रोग्राम फॉर एक्एटिक एनिमल डिसीज को देश में 14 विभिन्न राज्यों में चलाया गया ताकि जलजीव को महत्ता मिले। इस प्रोग्राम में 22 पार्टनर संस्थान भी शामिल हैं।
  • फिनफिश और साथ ही शेलफिश के ओआईई-लिस्टेड पैथोजन्स हेतु विकसित डॉयग्नोस्टिक केपेबिलिटी।
  • सीरम इम्यूनोग्लोब्यूलिन्स ऑफ चन्ना स्ट्रेटस, क्लारियास मैगूर एवं केटला केटला के विरुद्ध विकसित मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज, जो सेरो-सर्विलांस और वैक्सीन्स के प्रभावकारिता का मूल्यांकन में एप्लीकेशन होती है।
  • 16 व्यावसायिक प्रमुख खाद्य एवं ओरनामेंटल फिश स्पिसीज़ से डेवेल्पड सेल लाइन्स, जो डिज़ीज डॉयग्नसिस में एप्लीकेशन के रूप में कार्य करेगा। कटला और रोहू से मेक्रोफेज सेल लाईन्स का विकास किया, जो इम्यूनोमॉड्यूलेटर्स के आकलन हेतु विट्रो मॉडल्स में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • भारत सरकार की वित्तीय सहायता के साथ 50 फिश सेल लाईन्स के नेशनल रिपोज़िटरी ऑफ फिश सेल लाईन्स की स्थापना हुई।
  • Contributed to the preparation of several policy documents for conservation and sustainable utilization of fish genetic resources, in collaboration with other institutes/agencies, viz., Guidelines for Germplasm Exchange; National Strategic Plan on Aquatic Exotics and Quarantine; National Exotics and Quarantine Guidelines; Guidelines for Green Certification for Freshwater Ornamental Fishes and Model guidelines for Fish and Shellfish Seed Certification in India.